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क्या होगा अगर अचानक चंद्रमा नष्ट हो जाए? | What if Moon get destroyed | What if Moon comes closer to Earth

Moon getting Destroyed Seen From Earth

 

दोस्तों, astronomy से जुड़ी सबसे खास बात यही है कि हम सोच सकते हैं कि क्या होता अगर ऐसा होता या चीज़ें कुछ अलग होती?

Q1 – क्या होगा अगर चन्द्रमा हमारे पृथ्वी के दो गुना समीप आ जाये | What if Moon comes two times closer to Earth

जैसे अभी धरती का चांद धरती से करीब 3,84,000 किमी की दूरी पर परिक्रमा करता है। भले ही ये दूरी पूरे यूनिवर्स में पृथ्वी की किसी भी ऑब्जेक्ट की दूरी से कम है। लेकिन ये हमारे लिए अभी भी करीब 4 लाख किमी है, जिसे तय करने में एक स्पेस कैप्सूल को पूरे 4 दिन लग सकते हैं।

What is shown in “Bruce Almighty” Movie?

साल 2003 में आई एक्टर जिम कैरी की फ़िल्म “Bruce Almighty” में जिम कैरी के किरदार को अचानक से ही भगवान की शक्तियां मिल जाती हैं, और उन शक्तियों के दम पर वो अपनी प्रेमिका को impress करने के लिए चांद को खींचकर धरती के करीब ले आता है। उसी मूवी में बाद में दिखाया जाता है, कि चांद के धरती के इतना पास आ जाने की वजह से पूरी दुनिया में बाढ़, सुनामी आने का सिलसिला बहुत बढ़ गया है।

खैर मूवी में जो कुछ भी दिखाया गया था, वो पूरी तरह से fantasy ही था। लेकिन फिर भी इससे हमारे मन मे एक सवाल तो उठता ही है: क्या होता अगर ये चंद्रमा पृथ्वी के और पास या फिर असल से आधी दूरी पर होता? और क्या होगा अगर आसमान में चंद्रमा हो ही ना तब?

 

क्या कहती है Scientific Research | Impact on Earth and Life

यूनिवर्सिटी ऑफ Maine के physicist Neil Comins के अनुसार, असल मे, मूवी में जो दिखाया गया वो पूरी तरह गलत नही था। ये सच है कि चांद का धरती पर सबसे ज्यादा प्रभाव इसके गुरुत्वाकर्षण बल का धरती के सागरों में होने वाली ऊंची लहरों में नज़र आता है। इसकी वजह से रोजाना दो high tides और दो low tides समुद्र में आती ही हैं।

Comins के अनुसार अगर यही चांद पृथ्वी से अभी की आधी दूरी पर मौजूद होगा तो ये tides अभी से 8 गुना ऊंची होंगी। कुछ islands हमेशा के लिए पानी से डूब जाएंगे। और समुद्र तट जिन पर बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, वे वीरान हो जाएंगे, क्योंकि इतनी ऊंचाई लहरों की वजह से भयंकर सुनामी आने की संभावना हमेशा बनी रहेगी।

अगर चन्द्रमा अचानक से पृथ्वी से आधी दूरी पर आ जाएगा, तो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल की शक्ति अधिक हो जाने की वजह से एनर्जी वेव्स पूरे planet पर घूमेंगी। और अचानक से इस बढ़े गुरुत्वाकर्षण की वजह से सबसे ज्यादा दबाव पृथ्वी की सतह Crust पर पड़ेगा और जिससे भूकंप की तादाद और ज्वालामुखी फटने की घटनाएं भी काफी बढ़ जाएंगी।

उदाहरण के लिए जुपिटर का उपग्रह Io, जो पूरे यूनिवर्स का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी region है। Io में ज्वालामुखी फटने की सबसे ज्यादा घटनाओं के घटने की वजह जुपिटर और इसके दो अन्य चंद्रमाओं द्वारा Io पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल है। हमारी पृथ्वी का हाल भी कुछ ऐसा ही होगा, अगर चंद्रमा की दूरी पृथ्वी से आधी हो जाती है।

पृथ्वी पर तबाही का मंजर | Earth will also get Destroyed

पृथ्वी की crust पर असर पड़ने से इसकी spin करने की स्पीड कम हो जाएगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि चंद्रमा की ग्रेविटी पृथ्वी के समुद्रों को अपनी ओर खींचने की चेष्टा करती है और इस वजह से समुद्र तल और इसके पानी के बीच में होने वाले घर्षण से पृथ्वी के स्पिन करने की गति कम होती है। आज के टाइम पर पृथ्वी की स्पिन स्पीड हर सौ साल में सेकंड के हजारवें हिस्से जितनी कम हो रही है, लेकिन अगर यही चंद्रमा पृथ्वी से आधी दूरी पर होता, तो पृथ्वी की स्पिन और रोटेशन स्पीड और भी ज्यादा slow होती, जिससे कि पृथ्वी पर दिन और रात की लंबाई भी काफी बढ़ जाती।

अगर हम इस अचानक से आने वाले भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, दिन रात का बढ़ना और ऊंची लहरों से खुद को बचा भी लें, तो भी हमे अक्सर होने वाले सूर्य ग्रहणों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि तब चंद्रमा इस आसमान का ज्यादा हिस्सा कवर करेगा। जिसकी वजह से पृथ्वी से देखने पर उसके सूर्य के सामने से होकर गुजरने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। इसके अलावा चंद्रमा और उसकी कलाएं अभी जैसी ही आसमान में नजर आएंगी, बस उनका आकार बड़ा होगा।

लेकिन अगर यही चंद्रमा अचानक से पृथ्वी की आधी दूरी पर न आकर, धीरे- धीरे कई हज़ार सालों में पृथ्वी की तरफ आता जाता, तब क्या होता? तब पृथ्वी की crust और tides थोड़ा सध कर और वक्त लेकर कोई भी बड़ा बदलाव दिखाती, जिससे वहां रहने वाले जीवों को इसके साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए शायद समय मिल जाता। पृथ्वी पर लंबे दिन और रात हमारे पूरे climate को बदल सकते हैं

और प्रकृति में कुछ evolutionary बदलाव भी ला सकते हैं। ऐसे में जानवरों को खुद को रात में ज्यादा चमकीले चंद्रमा और रोशनी के साथ जीना सीखना पड़ेगा। जैसे उदाहरण के लिए, छोटे और कमज़ोर जीवों को रात में खुद को ज्यादा सतर्कता से छिपाना पड़ेगा, जिससे शिकारी उन्हें ज्यादा चमकीली रात में आसानी से ढूंढकर अपना निवाला न बना डाले। अगर ऐसा हुआ तो फिर उन्हें रात को चैन की नींद नसीब भी मुश्किल हो जाएगा। अच्छा ही है, कि अभी ऐसा होने की कोई संभावना नही है।

Q2 – अगर चन्द्रमा अचानक ही तबाह हो जाए तो ? | What if Moon is Destroyed

दोस्तों, अब आते हैं अपने दूसरे सवाल पर: क्या होगा अगर अचानक हमारा चंद्रमा नष्ट हो जाए? चंद्रमा के ना होने से पृथ्वी पर क्या असर होगा, आइए जानते हैं। सबसे पहले तो चंद्रमा की ग्रेविटेशनल बाइंडिंग एनर्जी करीब 120 मिलियन ट्रिलियन गीगाजूल्स है। इसका मतलब कि जब तक आप इतनी सारी एनर्जी एक बार मे नही लगाते हैं, इतनी एनर्जी से पूरा चंद्रमा एक बार मे पूरा फटकर वापस से अपने आकार में दोबारा आ सकता है। चंद्रमा को नष्ट करने के लिए आपको इस पर हर जगह सैकड़ों किलोमीटर गहरे माइन शाफ़्ट बनाने होंगे और उन पर करीब 600 बिलियन बड़े आकार के nuclear bombs गिराने होंगे।

ऐसा होने के बाद चंद्रमा का कोई भी टुकड़ा जो पृथ्वी की तरफ आएगा, उसमे उसी आकार के किसी एस्टेरॉयड की 1% impact energy ही मौजूद होगी, ऐसा इसलिए क्योंकि चंद्रमा का ऑर्बिट काफी निचला और पृथ्वी के करीब है। लेकिन उनमें से छोटे टुकड़े फिर भी काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि वो संख्या में काफी ज्यादा होंगे। इन पत्थरों की काइनेटिक एनर्जी को हमारे atmosphere द्वारा अब्सॉर्ब कर लिया जाएगा, जिससे यहां का temperature बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा, और इसका नतीजा धरती से सभी जीवों की समाप्ति के रूप में सामने आएगा।

पृथ्वी पर असर और जीवन

इसके अलावा चंद्रमा के कुछ बचे हुए टुकड़े पूरी पृथ्वी के चारों ओर रिंग के रूप में स्थापित हो जाएंगे। और जो गुरुत्वाकर्षण बल पहले पृथ्वी पर चंद्रमा से लगता था, उसके ना होने पर पृथ्वी का axial tilt पहले से और भी ज्यादा डगमगाने लगेगा। और ऐसा होने पर आने वाले कुछ हज़ार सालों में पृथ्वी अपनी वास्तविक जगह से करीब 45° तक झुक सकती है, जिससे कि पृथ्वी का एक hemisphere तो हमेशा सूर्य के उजाले में रहेगा, जबकि दूसरा hemisphere ज्यादातर वक्त अंधकार में डूबा रह जाएगा।

ये पूरी तरह सच है, कि पृथ्वी के इकलौते उपग्रह चंद्रमा के नष्ट होने पर धरती को काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए दोस्तो, अब तो आप समझ ही गए होंगे, कि चंद्रमा यानी चंदा मामा हमारे लिए कितने ज़रूरी है, और आखिर हो भी क्यों ना, वो हमारी पृथ्वी को इतनी आपदाओं से जो बचाकर रखते हैं।

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