
शनि – हमारे सौरमंडल का सबसे खूबसूरत ग्रह, इसकी खूबसूरती का समा देखते ही बनता है, हज़ारों करोड़ों पिंडों से मिलकर बनी इसकी ये रिंग्स इसे किसी भी ग्रह से अलग और अनूठा बनाती है, इन रिंग्स में रेत जितने महीन कणों से लेकर ऊंची ऊंची इमारतों तक अत्यंत विशालकाय पिंड मौजूद है, आप ये बात जान हैरान रह जायेंगे की शनि के इन छल्लो का विस्तार अन्तरिक्ष में 2 लाख 70 हज़ार किलोमीटर के फांसलें तक है, यानि हर क्षण करीब ढाई लाख वर्ग किलोमीटर में फैला चट्टानों का ये घेरा शनि ग्रह के साथ हरकत में रहता है |
शनि के ये रहस्यमी Rings आज तक हमारे लिए एक सवालिया निशान बनें हुए है, इनसे जुड़े बहुत से सवालों के जवाब आजतक हम नहिं खोज पाएं है, जिनकी तलाश हम आज के इस Episode में करेंगे, अतीत में इन छल्लो के जन्म से लेकर इनकी मौजूदा परिस्थिति तक, और भविष्य में इनके नष्ट होने तक की सभी सम्भावनाओ को आज हम इस विडियो में देखेंगे।

Discovery of Saturn Rings
साल 1610 में Astronomer Gallelio Gallie ने अपने Telescope से पहली बार Saturn की Rings को देखा था, उस वक्त वो इसे देख Confuse हो गए थे और इसी Confusion के चलते उन्होंने इसे “triple planet” का नाम दीया था, उनकी इस गलती को सुधारा उनके बाद हुए Astronomer Christiaan Huygens ने, Huygens ने शनि ग्रह के गिर्द मौजुद इस घेरे को गहनता से देखा और उनकी इस Observation में पहली बार शनि के पास Rings यानी छल्ले होने की पुष्टि हुई |
आगे चलकर कुछ सालों बाद जब astronomer Jean-Dominique Cassini ने अपनी दूरबीन से इस रिंग्स को देखा तो उन्होंने कुछ Strange Notice किया, दरअसल Cassini ने ये पाया की शनि के चारों ओर मौजूद रिंग्स दो अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित थी, जहां शनि ग्रह के नज़दीक मौजूद Ring B ज्यादा रौशन और उजली थी वहीं बिच में कुछ Kilometres के फांसले के बाद शुरु होने वाली Ring A रंग में गहरी और गंदली थी।
इन्हीं बारीकियों के आधार पर Further इन Rings ko दो विभिन्न Segments में Divide किया गया, सत्रहवीं शताब्दी के अंत होते होते हम शनि ग्रह से जुडी बहुत सी बातो को जान चूके थे, मगर क्या इतना काफ़ी था?, बिल्कुल नहीं…. आगे आने वाले वक्त में कुछ ऐसा होने वाला था जो शनि को देखने के इंसानी नजरिए को पूरी तरह से बदलकर रख देने वाला था,
Well समय का चक्का घुमा और फिर आया साल 1901 यानि बीसवीं सदी का आगाज़!, यहां से Technological Advancements और Development की ऐसी आंधी चली जिसने सबकुछ बदलकर रख दीया, सड़कों पर सरपट दौड़ती मोटर गाड़ियों से लेकर आसमान को चीरकर धरती के उस पार जाते रौकिटो तक सबके सब गवाह है इस सदी में हुई क्रांतिकारी प्रगति के…..

Missions to Study Saturn and it’s Rings
ये वही दौर था जब इन्सानों ने अपने Spacecrafts को अन्नत अन्तरिक्ष में रवाना करना शुरू किया था, इस कड़ी में तमाम Earth Satellites से लेकर Interplanetary Space Missions तक अंजाम दिए गए, इन्हीं Far Earth Missions में से एक था | Pioneer 11 :- एक ऐसा Interplanetary Mission जिसे नासा द्वारा साल 1973 में लॉन्च किया गया था, इस मिशन का उद्देश्य Asteroid Belt में मौजूद कुछ बेहद ही Significant Asteroids, Planet – Jupiter और Saturn को Study करना था, एक सितम्बर
सन 1979 कि तारीख को Pioneer 11 SPACECRAFT शनि के बादलों से महज़ 15 मिलों की दुरी से होकर गुज़रा, इस Fly-by के दौरान Pioneer 11 SPACECRAFT ने शनि और उसके छल्लों की कुल 440 तवीरें ली और उन्हें हमतक भेजा, ये इन्सानों का पहला Satrun Encounter था, पहली बार हम शनि ग्रह और उसकी इन रिंग्स को इतना नजदीक से देख रहे थे, सन 1610 :- जब Gallelio Gallie ने पहली बार शनि को अपनी दूरबीन से देखा था इसके बाद आज यानि साल 1979 को जब हम Actual में इसके इतने नज़दीक जाकर इसे देख रहे थे, पूरे 370 सालों का फांसला था,
हमने सबकुछ Scratch से शुरु करके इस पहले Milestone तक पहुंचने में कुल 370 साल लगाएं थे, but इससे आगे का ये सफर काफ़ी छोटा होने वाला था, Pioneer 11 से मिली कामयाबी के बाद, अस्सी के दशक में दो और Space Probes VOYAGER 1 और Voyager 2 Saturn के नजदीक से होकर गुजरते है, ये भी हमें शनि ग्रह की संरचना, उसकी रहस्यमी रिंग्स की बनावट और उसके तिलिस्मी चांदों की बहुत सी अहम जानकारियां मोहियां कराते है, |
अबतक शनि वैज्ञानिकों की आंखो में बस चुका था, इसकी ये खुबसूरत अदाएं वैज्ञानीको को खूब रिझाती थी, जिसके बाद नब्बे के दशक में नासा ने Dedicatedly शनि पर एक मिशन रवाना करने का प्लान तैयार किया, और इस दशक का अंत आते आते Finally इसे 15 अक्तूबर सन 1997 की रोज़ Cape Canaveral Space Launch Station से Titan 4 rocket में रवाना भी कर दीया गया था |

Start of Cassini Mission to Study Saturn Planet
बाहरी अंतरीक्ष में सात सालों का लम्बा सफ़र तय करने के बाद आखिकार साल 2004 के जून माह में ये Spacecraft शनि ग्रह की ऑर्बिट में पहुंचा, शनि की कक्षा में स्थापित होने के बाद ये अपने मिशन में जुट गया, इस दौरान इसने ऑर्बिट में ही रहते हुए शनि की रिंग्स का बारिकी से अध्ययन किया, इस दौरान इन रिंग्स की Mapping से लेकर Highly Sophisticated State of the Art on-board Spectroscopy instruments के जरिए इन रिंग्स की Spectral Study भी Perform की गई |
जिससे हमें इनकी Composition का पता चला, इसी के साथ Cassini Spacecraft ने आने वाले 13 सालों तक इसके 62 चंद्रमाओं का अध्ययन किया जिसमे से 7 नए चांदों की खोज भी की, विशेष तौर पर शनि का चांद Titan और Enceladus इस मिशन का केंद्र बिंदु बने रहे, टाइटन पर तो इस Spacecraft का एक MiniProbe भी उतरा जीसका नाम huygens था, जिसने Further हमे सौरमंडल के दुसरे सबसे बड़े चांद टाइटन के वायुमंडल और जलतंत्र की रहस्यमी जानकारियां दी, इसी प्रोब ने टाइटन पर तरल मिथेन की नदियां और झीलें होने की भी पुष्टि की।

Information about Saturn Planet
तो अबतक हम Saturn System के बहुत से पहलुओं से वाकिफ हो चूके थे, आज हम ये जानते है की Jupiter के बाद Saturn हमारे Solar System का 2nd Largest Planet हैं, Position के लिहाज़ से ये Sun से 6th Planet हैं। Saturn हमारी Earth से 95 times Massive है, इसकी Radius 58,232 Kilometres है, Saturn का Gravitational Pull Earth के Comparison में 1.8 times ज्यादा है, यानि Almost दुगना है, Saturn पर एक दिन महज़ 10.7 Earth Hours का होता है यानि शनि ग्रह महज़ साढ़े दस घंटों में ही अपनी Axis पर एक चक्कर पुरा कर लेता है, मगर जब बात आती है सन के अराउंड एक चक्कर की तो इसे पुरा करने में Saturn को पूरे साढ़े 29 साल लगते है।
अगर बात करें इस Massive Gas Giant के Composition की तो Saturn Mainly दो Elements से मिलकर बना है, जिसमें पहला है Helium और दूसरा Hydorgen, Saturn का Formation आज से करीब 4.5 billion years पहले हुआ था जब Hydorgen और Helium जैसी Light weight Gases Dust particles के साथ Sun से दूर जाने लगीं थी, जिसके बाद उनके एक स्थान पर संगठित होने से गैस के एक गोले का जन्म हुआ़, ये गैस का गोला सूरज के गिर्द घूमने लगा और कुछ ऐसे शनि ग्रह का जन्म हुआ़ मगर जहां तक बात इसके आसपास मौजूद इन रिंग्स की है तो ये बेहद बाद में आस्तित्व में आई,
वैज्ञानिकों के अनुसार शनि ग्रह की रिंग्स को जन्मे अभी महज 10 करोड साल ही हुए है, ये शनि ग्रह की रचना की तुलना में काफ़ी नई है, इनके जन्म को लेकर अब तक की हमारी खोज इस ओर ईशारा करती है की ये कुछ और नहीं बल्की बाहरी अंतरीक्ष में घूम रहे Comets और Asteroids यानी धूमकेतु और शुद्रग्रहों का संगठन है, बीतते वक्त के साथ जैसे जैसे शनि ग्रह का Gravitational Pull मजबूत हुआ
तो उसने अपने आस पास से गुजर रहे Asteroids और Comets को अपनी ओर खींचना शुरु कर दीया, अब जैसे ही ये Space rocks शनि ग्रह की ओर बढ़ते तो उसके कुछ नजदीक आने के बाद उसकी Gravitional Orbit में फंसकर रह जाते थे और कुछ यूं ही जब लाखों सालों तक ये प्रक्रिया जारी रही तो इन रिंग्स ने जन्म लिया, शनि ग्रह की रिंग्स की फॉरमेशन को लेकर एक Thoery और भी है, जिसमें Saturn के एक अंजाने चंद्रमा का जिक्र है, शनि का ये चांद उसकी बादली सतह से करीब चार सौ किलोमीटर दूर से ऑर्बिट करता था |

Saturn Rings Formation and Destruction
ये नजदीकी इतनी ज्यादा है की आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते, लगभग शनि से सटकर उसकी परिक्रमा करने वाला ये चांद एक दिन अपनी Declining orbit के चलते उससे जा टकराया जिसके बाद वो शनि के गिर्द ढेर सारे टुकड़ों में बिखर गया, इस चांद के टूटकर बिखरने से शनि के गिर्द मलबे की चट्टानों और पत्थरों का ढेर लग गया, जो Eventually आगे चलकर इसकी रिंग्स कहलाया!….
पत्थरों, चट्टानों और हिम-शिलाओं यानि बर्फिली चट्टानों से मिलकर बनी शनि की ये Rings Evolving Stage में है यानि इनका अब भी विकास हो रहा है, नियमित रुप से जैसे जैसे शनि अपने पास से होकर गुजरने वाले Space rocks को अपनी ओर खींचता है तो वो इसकी Rings का हिस्सा बन जातें हैं, इस विकास के साथ ही इस सिलसिलें में विनाश भी चलता रहता है, Recent researches से यह मालूम हुआ़ की शनि ग्रह की रिंग धीरे धीरे खत्म होती जा रही है, और Eventually एक दिन ये पूरी तरह से खत्म होकर Disappear हो जाएंगी।
Well इस Destruction का कारण है Saturn की Gravity, जी हां वही Gravity जिसके चलते कभी Saturn ने रिंग्स पाई थी आज उसी के कारण Saturn अपनी रिंग्स खोता जा रहा है,
दरअसल Saturn का Geavitonal Pull अब उसके आस पास मौजूद Matter को अपने अंदर खींचने लगा है जिसके चलते बेहद तेजी से ये रिंग्स Decay होती जा रही है, एक अनुमान के मुताबिक हर सैकेंड दस टन वजनी Ring Matter Saturn के अंदर गिरता जा रहा है, but यहां परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकी हमारे पास Saturn की इन Magnificent Rings को निहारने के लिए बहुत लम्बा समय बाकि है, in Fact ये भी हो सकता है की इससे पहले की Saturn की Rings पूरी तरह से Disappear हो हम Humans ही Planet Earth से Disappear हो जाएं, because we still have 300 Million Years to appriciate the beauty
जी हां हमारी अभी की Calculations के मुताबिक it would take more than 30 Crore Years to the rings of Saturn to be completely disappear.




