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पहले इंटरस्टेलर अंतरिक्ष यात्री: लाइट सेल पर टैर्डिग्रेड्स | The First Interstellar Astronauts: Tardigrades on Light Sails

In this article we will discuss about how microscopic tardigrades could pave the way for deep-space biology.

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From Artemis to Beyond: Human Returns and Future Plans

आज से केवल कुछ सालो के बाद NASA के Artemis Mission के अंतर्गत Astronauts फिर से आपको Moon से Surface पर चलते हुए दिखेंगे | NASA के साथ ही European Space Agency – ESA , JAXA , China और Russia की Space Agencies भी अपने मिशनों के जरिये Moon पर वापिस जाने की योजना पर काम कर रही है |

वही SpaceX के जरिये NASA और Chinese Space Agency – 2030 तक मंगल ग्रह पर इंसानो को भेजने पर विचार कर रही है | जो की मंगल ग्रह के Surface पर Human Base बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है |

Artemis Moon Mission

Technical Challenges of Sending Humans Interstellar

पर वर्तमान समय में इंसानो को Interstellar Space में भेजने की कोई योजना नहीं है | हालाँकि दुनियाभर की Space Agencies – Interstellar Space में अपने Robotic Missions भेजने पर विचार तो कर रही है |

पर वर्तमान समय में हमारे पास इंसानो को दूर तारो और दूसरे Exoplanets तक भेजने लायक Technology मौजूद नहीं है | पर हाल ही में किये गए एक अध्यन में वैज्ञानिको ने इंसानो को Interstellar Space में भेजने से पहले धरती के एक दूसरे जीव Tardigrades को Interstellar Space और Exoplanets पर भेजने पर विचार कर रहे है |

” The First Interstellar Astronauts Will Not Be Human ” नाम से Publish किये गए इस Research Paper को UC Santa Barbara, UCLA Health Center और University of Florida में मौजूद वैज्ञानिको द्वारा तैयार किया गया है | इस Research Paper में वैज्ञानिको ने चर्चा की है की कैसे हम NASA के Starlight Program के अंतर्गत दूसरे Solar System पर भेजे जाने वाले Light Sails के साथ धरती पर मौजूद Tardigrades नाम के जीव को भी Interstellar Space में भेज सकते है |

LightSail

Starlight Program and Light Sails Concept

Starlight Program को 2009 में NASA Space Grant Consortium ने स्थापित किया था जिसे NASA Innovative Advanced Concepts द्वारा Fund किया जा रहा है | इस Program का मुख्य मकशद ऐसी Technology पर काम करना था जिसके जरिये हम Lasers या Solar Radiation का उपयोग कर छोटे Spacecrafts या Light Sails को बेहद ही High Speed से Space में Accelerate कर सके |

हाल के ही कुछ वर्षो में वैज्ञानिको ने Interstellar Travel करने के लिए Light Sails का उपयोग करने में ख़ास रूचि दिखाई है जिसपे कई तरह के Experiments भी किये गए है | इसमें से एक Breakthrough Starshot का Concept भी शामिल है जिसके अंतर्गत Light Sails को प्रकाश की गति के 20 प्रतिशत की गति से Accelerate किया जा सकता है | ऐसे में ये Light Sails हमारे सूर्य से सबसे नजदीक में मौजूद Alpha Centauri – Star System तक का सफर केवल 20 वर्षो में ही पूरा कर सकते है |

इसी वजह से वैज्ञानिक इस Technology पर ख़ास रूचि दिखा रहे है क्यूंकि इसके जरिये हम बेहद ही कम वर्षो में दूसरे Star Systems और उनका चक्कर लगा रहे Exoplanets की यात्रा और उनका अध्यन कर सकते है | पर वैज्ञानिको की एक Team के अनुसार भविस्य में इन Light Sails का उपयोग Deep Space Biological Studies में भी किया जा सकता है |

इसके अंतर्गत इन Light Sails के साथ धरती पर मौजूद खुश ख़ास Microscopic जीवो को भी दूसरे तारो की यात्रा पर भेजा जा सकता है | ताकि यह Test किया जा सके की Interstellar Space के खतरनाक Radiation और Extreme Environment का इन जीवो पर क्या असर पड़ता है | और क्या ये जीव दूसरे सौरमंडलो तक के सफर के दौरान जीवित बच पाते है या नहीं |

Tardigrades

Tardigrades’ Interstellar Mission

वैज्ञानिक Stephen Lantin के अनुसार Space में भेजे जाने वाले जीवो को चुनने में सबसे महत्वपूर्ण उस जीव का आकार और Mass होता है | ये जीव जितने छोटे होंगे हम उतने अधिक जीवो को एक साथ Space में ले जा सकते है ऐसे में अगर सफर के दौरान इनमे से कुछ जीव मर भी जाते है तो भी हमारे पास बचे हुए जीवो की एक बड़ी मात्रा मौजूद होगी |

साथ ही इन जीवो का Mass जितना कम होगा उन्हें स्पेस में भेजने के लिए हमें उतनी ही कम Energy की आवश्यकता होगी | ऐसे में चुने गए जीव का Mass कम से कम होना चाहिए ताकि हम ज्यादा से ज्यादा जीवो को Space में भेज सके |

और इसी वजह से वैज्ञानिको ने हमारे धरती पर पाए जाने वाले Microbe जिसे Tardigrades के नाम से जाना जाता है उसे इस Experiment के लिए चूना है | ये जीव केवल 0.5 mm विशाल होते है जो की धरती के लगभग हर कोने पर पाए जाते है | Tardigrades को धरती पर पाया जाने वाला सबसे कठोर जीव माना जाता है जो की Extreme Temperature , Extreme Pressure , Radiation , Dehydration और Space Vaccum में भी अपने आप को जीवित रख सकते है |

अभी तक वैज्ञानिको ने इस जीव पर कई तरह के Experiments को अंजाम दिया है जिसके अंतर्गत इन्हे Space में ले जाया गया , इन्हे Extreme Heat और Cold में रखा गया और साथ ही इन्हे Solar Radiation और Space Vaccum में भी Expose किया गया | पर इन सभी के बावजूद भी ये जीव अपनी ख़ास बनावट और Features के चलते इन सभी Condition में अपने आप को सुरक्षित रखने में कामयाब रहे जहा धरती के दूसरे जीव आसानी से मर गए |

इसी वजह से इन जीवो को Future Deep Space Missions और Interstellar Missions के लिए Perfect जीव माना जा रहा है | जो की भविस्य में दूसरे तारो का चक्कर लगा रहे Exoplanets में धरती से जीवन को पहुंचाने और उन्हें Terraform करने का काम भी कर सकते है |

पर आपके मन भी कई तरह के सवाल उठ रहे होंगे की कैसे ये जीव Space में जीवित रह सकते है , आखिर इन्हे Interstellar Space में कैसे भेजा जाएगा और क्या उनसे Interstellar Space में संपर्क कर पाना संभव है या नहीं | ऐसे में आगे हम Tardigrades को Interstellar Space में भेजे जाने को लेकर कुछ रोचक सवालो और उनके जवाबो को जानेंगे |

Tardigrades Near Moon

क्या Tardigrades अंतरिक्ष में जीवित रह सकते हैं ?

जब वैज्ञानिको से यह सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था की Space में सबसे बड़ा खतरा Radiation से होता है , हमारा सूर्य Radiation Emit करता है जिसके सीधे संपर्क में आने से Human DNA और Muscle को काफी नुक्सान होता है | साथ ही दूसरे तारो और Cosmic Bodies से भी Galactic Radiation आता है जो की खतरनाक होते है | International Space Station में किये गए एक Experiment के अंतर्गत धरती पर मौजूद कुछ ख़ास तरह के जीवो को Space के Radiation और Temperature में Expose किया गया |

इस Experiment के दौरान वैज्ञानिको ने कुछ ख़ास तरह के जीवो की पहचान की जिन्होंने इस Experiment में सबसे अच्छा Perform किया था जिसमे Tardigrades भी एक था | वैज्ञानिको के अनुसार Experiment के दौरान चुने गए जीवो में एक ख़ास तरह का Mechanism मौजूद है जो की Space Radiation के कारण Damage हुए DNA को Repair कर सकते है | साथ ही ये जीव Space में जिन्दा रहने के लिए Cryptobiosis नामक Method का उपयोग करते है जिसके अंतर्गत ये एक तरह के Hibernation में चले जाते है | इस दौरान इन जीवो की Metabolic Activity पूरी तरह गिर जाती है और ये कम से कम Oxygen , Water और Energy का उपयोग करते है | ये जीव लगभग एक तरह से Dead हो जाते है इस दौरान ये किसी बीज की तरह होते है जो की समय पड़ने पर अपने आप को जीवित कर सकते है |

अंतरिक्ष में रहते हुए हम इन जीवो से कैसे संपर्क कर सकते है?

हमने अभी तक तो जान ही लिया है की कैसे ये जीव Space के खतरनाक हालातो में भी जीवित रह सकते है | पर यहाँ एक सवाल यह है भी है अगर हम इन्हे Space में भेज भी दे तो हम इनसे संपर्क कैसे करेंगे |
इसपर वैज्ञानिको का कहना है की वो इन जीवो को Space में भेजने वाले Capsule में एक ख़ास तरह के Sensors का उपयोग करेंगे जो की इनका अध्यन करने में सक्षम होंगे | सबसे पहले इन जीवो को उनके Dehydrated या Hibernate State में Space में भेजा जाएगा जिसके बाद धरती पर मौजूद वैज्ञानिक उन्हें Water या किसी और चीज की मदद से Remotely जगाएंगे |

जिसके बाद वैज्ञानिक यह अध्यन करेंगे की Space में भेजे गए इन जीवो में से कितने जीव सुरक्षित ज़िंदा हो पाते है | उसके बाद हम ज़िंदा हुए जीवो का अध्यन करेंगे की Space के खतरनाक हालातो की वजह से उनके Cell में क्या बदलाव आते है और क्या वो अपने DNA को सुरक्षित रख पाते है या नहीं | Tardigrades के Cells और DNA में हो रहे बदलावों को देखकर धरती पर मौजूद वैज्ञानिक इनका अध्यन कर सकते है चाहे वो हमसे कितने भी दूर ही क्यों न हो |

LightSail and Earth

क्या हमें Space में इन Tardigrades की जगह Robots को नहीं भेजना चाहिए, Space में इन जीवो को भेजने का क्या लाभ है ?

इसपर वैज्ञानिको का जवाब है की हमने Voyager 1 और Voyager 2 मिशनों के जरिये पहले ही Outer Space और Interstellar Space में अपने Robots भेज चुके है | इन मिशनों ने पहले अनजान Interstellar Space और वहा मौजूद Cosmic Radiation से जुडी हुई कई महत्वपूर्ण जानकारिया वैज्ञानिको को भेजी है | ये Robotic Missions आगे जाकर भविस्य में दूसरे तारो और Star Systems की यात्रा करेंगे |

पर जीवो को Space में भेजना हमारे लिए बेहद ही नया है हमने जरूर कुछ Experiments के जरिये जीवो को धरती के Low Earth Orbit में मौजूद Space Station और Moon तक भेजा है | पर हम अभी तक अच्छे से यह Experiment नहीं कर पाए है की आखिर Outer Space का जीवो पर क्या असर पड़ता है | ऐसे में इन Experiments के जरिये हम इस सवाल का जवाब जानने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा सकते है |

हम कबतक इन Tardigrades को Space और फिर Interstellar Space में भेज सकते है |

इस Experiment से जुड़े हुए वैज्ञानिक NASA द्वारा Funded – Starlight Project पर भी काम कर चुके है | Starlight Project के अंतर्गत वैज्ञानिक एक बेहद ही Light Weight – Laser Sail Propulsion को Interstellar Space में भेजने पर काम कर रहे है | इन्हे धरती पर मौजूद Lasers के जरिये Propel किया जाएगा जो की Light के Speed के लगभग 20 प्रतिशत की गति से Travel करने में सक्षम है |

इस गति से इन्हे हमारे धरती से 4.3 Light years की दुरी पर मौजूद सबसे नज़दीकी Alpha Centauri Star System तक पहुंचने में केवल 20 सालो का ही समय लगेगा | पर वैज्ञानिको के अनुसार वर्तमान समय में इस Technology पर काम चल रहा है ऐसे में इसे हक़ीक़त बनने में और करीब 10 से 15 सालो का समय लग सकता है | ऐसे में जब इन Light Sails को Launch किया जाएगा तब इनके साथ इन Tardigrades को भी इस Journey में भेजा जाएगा | ऐसे में ये जीव हमारे सौरमंडल के अलावा किसी दूसरे Star System की यात्रा करने वाले पहले जीव बन जाएंगे |

Universe Hindi

Geetesh Patel is a Science enthusiast, he has a successful running youtube channel with over 1 Million Subscriber. And he Owns Universe Hindi and other Blogs and Websites.

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