
धरती से ज्यादा पानी सौरमंडल के इन चन्द्रमाओ में मौजूद है | Ocean Worlds of Our Solar System – Moons and Dwarf Planets
In this Artcle we will discuss about some of the Moons of Saturn and Jupiter and some of the Dwarf Planets of our Solar System.
जीवन के पनपने के लिए पानी का महत्व | Importance of liquid water for evolving of life
दोस्तों Liquid Water किसी ग्रह पर जीवन के पनपने के लिए जरुरी तीन सबसे जरुरी Key Ingredients में से एक है | वैज्ञानिको का मानना है की Ancient Earth में मौजूद भरपूर Liquid Water की वजह से ही हमारे धरती पर जीवन पनप पाया था | Space युग की शुरुआत के बाद से ही हम इंसानो ने हमारे सौरमंडल के दूसरे ग्रहो व उनके चन्द्रमाओ पर Liquid Water की खोज करना सुरु कर दिया था क्यूंकि अगर वह Liquid water मौजूद है तो काफी सम्भावना है की वह किसी प्रकार का Microbial Life या Complex Life भी मौजूद हो सकता है |
सालो की खोज के बाद हमें अभी तक किसी Planet या उसके Moon के Surface पर Liquid Water तो नहीं मिल पाया है | पर ह में अपनी खोज में जरूर कुछ ऐसे सबूत मिले है जिनके अनुसार हमारे सौरमंडल के कुछ Moons और Dwarf Planets में Underground Liquid Water के Oceans मौजूद हो सकते है | ऐसे में आज हम हमारे सौरमंडल में छुपे हुए Underground Oceans की खोज करेंगे जहा हमारे धरती से भी ज्यादा Liquid water मौजूद हो सकता है |
किसी भी Planet या उसके Moon पर जीवन की उत्पत्ति के लिए तीन Key Ingredients का होना जरुरी होता है | ये तीन Basic Ingredients है Liquid Water, Energy और Organic Compound | अगर किसी ग्रह पर ये तीनो Ingredients सही मात्रा में मौजूद होते है तो उस ग्रह पर जीवन की पनपने की सम्भावनाये सबसे अधिक होती है | पर इन सभी में Liquid Water को सबसे महत्वपूर्ण और जीवन के पनपने के लिए सबसे Ideal जगह माना जाता है |

Ocean Worlds of Solar System
दूसरे ग्रहो और उनके Moons पर भेजे गए Space Missions के जरिये हमने पृथ्वी से परे हमारे सौरमंडल में मौजूद कुछ ऐसे जगहों की खोज की है जहा Liquid Water के Underground Oceans मौजूद हो सकते है | और अगर इन Underground Oceans में पर्याप्त मात्रा में Organic Compound और Energy मौजूद हो तो यहा किसी प्रकार का जीवन भी पनप सकता है | तो चलिए हम कुछ ऐसे ही Moons और Dwarf Planets के बारे में जानते है

1) Europa
युरोपा Jupiter ग्रह का चौथा सबसे बड़ा Moon है इसके बारे में खास बात यह है कि इसका Surface न तो उबड़ ख़ाबड़ है और ना ही इस पर किसी भी तरह के Cracks मौजदू है | जिससे वैज्ञानिको ने अनुमान लगाया है की Europa का Surface – Geologically काफी Young है जो की एक Liquid Mantle Core के उप्पर मौजूद है |
सबसे पहले 1979 में Voyager मिशनों ने इस Planetary System के Flyby को अंजाम दिया था जिसके बाद 1995 से लेकर 2003 तक Galielo Mission इसके Orbit में इसका अध्यन करता रहा | इन मिशनों द्वारा जुटाई गयी जानकारियों की मदद से वैज्ञानिको ने पहली बार अनुमान लगाया की Europa के Icy Surface के नीचे Liquid Water के Oceans मौजूद हो सकते है |
इसके कुछ सालो बाद Hubble Space Telescope व कुछ और Ground Based Telescopes ने Europa के Surface से निकलने वाले Water Plumes की खोज की | ये Plumes इसके South Pole से निकल रहे थे जो की इसके Atmosphere में करीब 200 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा रहे थे |

इस खोज के बाद यह Confirm हो गया की Europa के Icy Surface के नीचे Saltwater के विशालकाय Oceans मौजूद है | वैज्ञानिको का अनुमान है की Saltwater के ये Oceans करीब 60 से 150 किलोमीटर तक गहरे हो सकते है | यानी पृथ्वी से आकर में केवल एक चौथाई होने के बावजूद Europa में हमारे धरती के महासागरों के मुकाबले करीब 2 गुना ज्यादा Liquid Water मौजूद हो सकता है |
विशालकाय Jupiter ग्रह के Gravity के कारण होने वाले Tidal Flexing और Gravitational Interaction की वजह से Europa Moon इतनी Heat Generate कर लेता है की ये इन Underground Oceans को Liquid रख सके | पर सूर्य से बेहद ही ज्यादा दुरी पर मौजूद होने के कारण इसका Surface का तापमान बेहद ही कम है जो की Frozen ही रहता है | वैज्ञानिको के अनुसार इसके Underground Oceans का Oxygen Level हमारे पृथ्वी में मौजूद Deep Sea जितना ही हो सकता है | ऐसे में काफी सम्भावना है की इन समुद्रो में किसी प्रकार का Microbial Life या Comlplex Life पनप रहा हो |

2) Pluto
दोस्तों Pluto हमारे सौरमंडल के Outer Region में मौजूद एक Dwarf Planet है जो की आकार में हमारे Moon से भी छोटा है | शुरू में वैज्ञानिको का अनुमान था की सूर्य से बेहद ही ज्यादा दुरी पर मौजूद होने के कारण यह एक Inactive Dwarf Planet होगा जहा Billion सालो से कोई हलचन नहीं हुई होगी | पर इस Dwarf Planet पर भेजे गए NASA के New Horizons Mission ने दुनियाभर के वैज्ञानिको को हैरान कर दिया जब उसने इस Dwarf Planet पर कई ऐसी खोजे की जो की यह बतलाता है की यह Dwarf Planet आज भी काफी Active है |
अपने छोटे आकार और सूर्य से काफी ज्यादा दूर मौजूद होने के कारण यह एक Molten Core के लिए जरुरी Heat को Trap कर पाने में नाकाम रहा | Pluto को थोड़ी बहुत जो Energy मिलती है वो उसे उसके Surface के नीचे से आने वाली Radioactive Heating की वजह से मिलती है पर यह हमारे पृथ्वी को मिलने वाली Energy की तुलना में काफी कम है | पर यह इतनी जरूर है की यह इसके Interior में मौजूद Lighter Elements को Melt कर सके ताकि Heavier Silicate Minerals नीचे इसके Core में आ सके | और इसी वजह से Pluto के पास एक 1700 किलोमीटर विशालकाय Rocky Core मौजूद है जो की 100 से 180 किलोमीटर Thick Water और Ice के Layer से ढका हुआ है |

Pluto का Surface इतना ठंडा है की यह Solid Nitrogen , Methane , Carbon Monooxide से बने हुए Snow से ढका हुआ है पर वही इसका Bedrock – Water Ice के चादर से ढका हुआ है | इसके Crust के नीचे मौजूद Mantle में इसके Core से आने वाले Heat की वजह से Slush और Water का एक Mixture मौजूद हो सकता है | इसके Surface में मौजूद Heart Shaped -Tombaugh Region एक ऐसी जगह है जहा किसी प्रकार का कोई Crater मौजूद नहीं है जो की यह बतलाता है की यह जगह Geographically Active है |
वैज्ञानिको के अनुसार कई Million सालो से इसके Surface में मौजूद Nitrogen Ice – Movement कर रहा है जिसकी असल वजह इसके Surface के नीचे मौजूद Oceans हो सकते है | साथ ही हाल ही में वैज्ञानिको ने पहली बार इसके Surface में मौजूद Ice Volcanos को खोजने का दावा किया है जो की इसके Surface के नीचे मौजूद Liquid Oceans और इसके Geographically काफी Active होने की बात को Confirm करते है |

3) Enceladus
दोस्तों Enceladus शनि ग्रह का एक Icy Moon है जो की कई किलोमीटर मोठे बर्फ के परत के ढका हुआ है | सूर्य से काफी दूर मौजूद होने की वजह से ज्यादातर वैज्ञानिको का मानना था की यह Inactive Icy Moon है | पर 2005 में NASA के Cassini Mission ने इसके South Pole से निकलने वाले Water Plumes की खोज की जो की यह बतलाता है यह Moon आज भी काफी Active है जिसके Surface के नीचे Underground Oceans मौजूद है |
Enceladus की Gravity हमारे Earth के तुलना में केवल एक प्रतिशत ही है जिसकी वजह से इन Plumes में मौजूद Icy Crystals आसानी से इसके Orbit में चले जाते है | और हाल ही में किये गए अध्यन के अनुसार इन Plumes से निकलने वाले Icy Crystals शनि ग्रह के E Ring में मौजूद ज्यादातर Materials के लिए जिम्मेदार है |

Enceladus का Core करीब 370 किलोमीटर विशाल है जो की 10 किलोमीटर Thick – Underground Ocean से ढका हुआ | इसके उप्पर Frozen Ice का कई किलोमीटर विशाल Crust मौजूद है | सुरु में वैज्ञानिको का मानना था की केवल इसके South Pole के नीचे एक Underground Lake मौजूद है क्यूंकि इसी जगह पर Cassini ने Water Plumes की खोज की थी | पर कई सालो तक किये गए अध्यनो के बाद वैज्ञानिको का कहना है की इसके Core और Icy Crust के बीच Liquid Water का Ocean मौजूद है जो की दोनों को अलग करता है | यह Liquid Ocean कई किलोमीटर विशाल है जो की इस Moon के Volume का करीब 40 प्रतिशत है |
इसके Surface Ice की Average मोटाई करीब 20 से 45 किलोमीटर है पर इसके South Pole में यह केवल 5 किलोमीटर ही है | और इसी वजह से केवल इसके South Poles से Water Plumes निकलते है जिसकी खोज Cassini Probe ने की थी | Enceladus को Energy या तो शनि ग्रह के Tidal Heating से या तो उसके Geothermal Energy से मिल रही है जिसकी वजह से इसका Underground Ocean आज भी मौजूद है पर कई सालो तक खोज के दौरान भी यह Energy Source वैज्ञानिको के लिए एक पहेली बना हुआ है |

4) Ceres
दोस्तों Ceres हमारे Inner Solar System में मौजूद एक Dwarf Planet है जो की Jupiter और मंगल ग्रह के बीच मौजूद Asteroid Belt में स्तिथ है | वैज्ञानिको के अनुसार इस Dwarf Planet का निर्माण 90 प्रतिशत Porous Rock और 10 प्रतिशत Ice के Mixture से मिलकर हुआ है |
जब Ceres का निर्माण हो रहा था तब इसके Heavier Elements के Radioactive Decay के कारण काफी Heat Generate हुआ जिसकी वजह से सारा Frozen Ice Melt हो गया और ज्यादातर Rock इसके Core में Sink हो गया | पर यह heating इतनी अधिक नहीं थी की वह इसके Surface में मौजूद Ice को पिघला सके , जिसकी वजह से इसका 10 किलोमीटर Thick ऊपरी Surface पहले की ही तरह Frozen ही रहा | पर धीरे धीरे इसका Underground Ocean , इसके Core के Internal Heating की वजह से गर्म होने लगा, और इसने Surface पर कई सारे Crack कर दिए |

पर समय के साथ इसका Core ठंडा होने लगा जिसके साथ ही इसके interior में मौजूद Underground Ocean भी फिर से Solid में Freeze हो गया | पर वैज्ञानिको का मानना है की Ceres के Solid Surface के नीचे आज भी Liquid Water का एक विशालकाय Ocean मौजूद हो सकता है | Herchel Space Telescope की मदद से वैज्ञानिको ने Ceres के Surface से निकलने वाले Plumes की खोज की जो की 6 किलोमीटर प्रति Second की तेज रफ़्तार से Space में Water Eject कर रहे थे |
एक अनुमान के अंतर्गत वैज्ञानिको का मानना है की Ceres के Icy Mantle में हमारे धरती से ज्यादा Fresh Water मौजूद हो सकता है पर यह कहना मुश्किल है की इनमे से कितना Ice है और कितना Liquid | Ceres का एकमात्र Energy Source इसके Core में हो रहा Radioactive Decay है जिसकी वजह से इसका Interior गर्म होता है पर ये और कितने सालो तक अपने Interior में मौजूद Subsurface Liquid Oceans को Liquid रख पाएगा यह आज भी वैज्ञानिको के लिए एक सवाल ही है |

5) Triton
दोस्तों Triton हमारे सौरमंडल के Outer Region में मौजूद Neptune ग्रह का सबसे बड़ा Moon है | यह आकार और Composition में Pluto से काफी मिलता जुलता है ऐसे में वैज्ञानिको का मानना है की इनका निर्माण Outer Solarsystem में Kuiper belt में हुआ था जो की बाद में Neptune और Uranus जैसे ग्रहो की Gravitational Pull की वजह से Inner Solar System में खींचे चले आये | Neptune ग्रह की Gravity ने Triton को Capture तो कर लिया पर इसने Neptune ग्रह के Spin की उलटी दिशा में इसका चक्कर लगाना सुरु करदिया जो की काफी अजीब था |
जब Neptune ग्रह ने Triton को Capture किया था तब इसका Orbit – Circular न होकर काफी अजीबो गरीब
था जिसकी वजह से Triton कई बार Neptune Planet के काफी करीब आ जाता था तो कई बार इससे काफी दूर चला जाता था | जिसकी वजह से Triton को Tidal Heating यानी एक तरह के खिचाव का सामना करना पड़ा जिससे इस Moon में काफी Heat Generate होता था |

इस Tidal Heating की वजह से इसका Interior Melt हो गया जिसने एक Dense Core का निर्माण किया जिसके उप्पर Liquid Water का Mantle और Nictrogen Ice व Water का Solid Crust मौजूद था | कई Million सालो तक इसका Crust – Tidal Heating की वजह से Generate होने वाले Heating के चलते इसके Interior में मौजूद Subsurface Ocean को Freeze होने से रोकता रहा |
पर धीरे धीरे इसका Orbit पूरी तरह Stable हो गया और इसे Tidal Heating की वजह से Energy मिलना भी बंद हो गया | ऐसे में इसे अब Energy केवल इसके Core में होने वाले Radioactive Elements के Decay से ही मिल रही थी जो की इसके Underground Oceans को Liquid में रख पाने के लिए पूरी तरह काफी नहीं था | पर वैज्ञानिको का मानना है की Triton के Surface के नीचे आज भी Liquid Water के कई किलोमीटर Thick Layer मौजूद हो सकते है |

6) Ganymede
Ganymede न सिर्फ Jupiter बल्कि हमारे सौरमंडल का सबसे विशालकाय Moon है जो की आकार में Mercury Planet से भी बड़ा है | आकार में बड़ा होने के बावजूद Ganymede का Mass – Mercury Planet की तुलना में आधा ही है जो की यह बताता है की यह आधा Solid और आधा Water से बना हुआ हो सकता है | 1990 में जब NASA का Galileo Mission पहली बार इस Moon के करीब से होकर गुजरा तब उसने पाया की इस Moon का खुद का अपना Magnetic Field मौजूद है जो की यह दर्शाता है की इसका Core – Molten Iron से बना हुआ है |
ऐसे में इसका Core आज भी इतना गर्म होगा की यह इसके Core के नज़दीक मौजूद Ice को पिघलाकर Underground Ocean का निर्माण कर सके | ऐसे में यह Subsurface Ocean करीब 100 किलोमीटर तक गहरा हो सकता है जो की इसके Frozen Icy Surface के नीचे मौजूद है | वही कुछ वैज्ञानिको का मानना है की इसके Icy Surface के नीचे Oceans के कई Layers मौजूद हो सकते है जिन्हे Solid Ice के Layers अलग करते है |

Ganymede में मौजूद Subsurface Ocean इसके Surface के काफी नीचे मौजूद है जिसकी वजह से हमें इसके Surface पर Water Plumes या किसी प्रकार की कोई हलचल नहीं नज़र आती जैसे की हमें शनि और Jupiter ग्रह के कुछ Moons में देखने को मिलता है |
हालाँकि वैज्ञानिको को Ganymede के अध्यन के दौरान कई और ऐसे सबूत मिले है जो की इसके Surface के नीचे एक Undergeound Ocean की ओर इशारा करते है | Jupiter ग्रह के बेहद ही Strong Magnetic Field की वजह से कई बार Ganymede के Thin Atmosphere में हमारे धरती की तरह ही Auroras देखने को मिलते है | Ganymede पर Aurora का अध्यन करते हुए Hubble Space Telescope ने पाया की इसके Auroras एक ख़ास तरह से Move करते है जो की इसके Salt Water से भरपूर Underground Oceans की वजह से हो सकता है जो की इसे Electrically Conductive बना देते है |
7) Callisto
Callisto – Jupiter ग्रह का दूसरा सबसे विशालकाय Moon है जो की आकार में Mercury Planet के लगभग बराबर है | पर इसका Mass – Mercury ग्रह के Mass का केवल एक तिहाई है जो की यह बतलाता है की इस Moon का 50 प्रतिशत हिस्सा Water Ice और Liquid Water से बना हुआ हो सकता है | Callisto का Surface पूरी तरह अलग अलग Size और Shape के Craters से भरा हुआ है जो की यह बतलाता है की यह Moon कई Billion सालो से Geographically Inactive है |
पर इसके बावजूद वैज्ञानिको का मानना है की इसके Icy Surface के नीचे Liquid Water के Oceans मौजूद है | Jupiter ग्रह के Magnetic Field के साथ इसके Interaction का अध्यन करने के बाद वैज्ञानिको ने पाया की इसके Surface से करीब 10 किलोमीटर नीचे एक Conducting Layer मौजूद है जो की एक Liquid Water का Layer हो सकता है |
Callisto – Jupiter ग्रह का चक्कर बेहद ही ज्यादा दुरी से लगाता है ऐसे में इसे दूसरे Moons की उपेक्षा काफी कम Tidal heating मिलती है | ऐसे में वैज्ञानिको के अनुसार इसके Surface के नीचे मौजूद Underground Ocean के Liquid Form में बने रेहनी की असल वजह Internal Heating के अलावा कुछ और भी हो सकती है | Callisto – Jupiter ग्रह के Radiation Belt से काफी दुरी पर मौजूद है और साथ ही इसके Surface में भरपूर मात्रा में Water Ice मौजूद है ऐसे में यह भविस्य के Human Base के लिए एक Suitable Candidate हो सकता है | पर इसके Underground Oceans में किसी प्रकार के जीवन होने की सम्भावना बेहद ही कम बताई जाती है |
दोस्तों आज के Article में बस इतना ही आपको क्या लगता है की इन सभी में से किस Solar Body पर Liquid Water के Oceans मौजूद हो सकते है हमें नीचे Comment कर जरूर बताये |



