
हर सुबह जब सूरज उफक पर चड़ता है तो पूरी दुनिया को अहसास होता है की सुबह हो गई है, हर एक सुबह अपने साथ एक नया पैगाम लेकर आती है, हमें यह एहसास दिलाती है कि कैलेंडर की तारीख और दिन दोनों ही बदल चुका है, मगर क्या आपने कभी यह सोचा है? की ना जाने पिछले कितने हजारों- करोड़ साल से कुदरत का यह निजाम यूं ही बदस्तूर जारी है, हर दिन सूरज आसमान में चढ़ता है और शाम होते ही ढल जाता है ।
इस ग्रह पृथ्वी पर इस नजारे को देखने के लिए 800 करोड़ इंसान मौजूद हैं मगर हमारे सौरमंडल के साथ और ग्रहों पर यह नजारा देखने के लिए कोई भी मौजूद नहीं है, वहां भी रोजाना सूरज चढ़ता और ढलता है मगर उसकी खूबसूरती की तारीफ करने के लिए वहां कोई भी मौजूद नहीं है, कहीं उगते सूरज का नज़ारा बेहद चटक-चमकीला है तो कहीं डूबता सूरज का मंजर बेहद नीला!…
सौरमंडल के प्रत्येक ग्रह पर सूरज के उदय और अस्त होने का यह मंजर अलग अलग दिखाईं पड़ता है, पृथ्वी पर रहते हुए तो आपने यह नजारा हजारों बार देखा होगा, मगर आज जो आप देखने वाले हैं वह वाकई आपने आज से पहले कभी नहीं देखा होगा जी हां आज हम चलेंगे सौरमंडल के दूसरे ग्रहों पर और वहां से सूरज को उगता और ढलता देखेंगे साथ ही ऊन बातों पर भी निगाहें डालेंगे जो विभिन्न ग्रहों पर सूरज की दिखावट और रंग रूप को प्रभावित करती है।
Different Planets and Moons of Our Solar System

Venus Planet
आइए सबसे पहले आपको लेकर चलते हैं पृथ्वी के सबसे नजदीकी ग्रह शुक्र यानी Venus पर!, अरे इतना अंधेरा क्यों है भाई?, कहीं रात तो नहीं हो रही?, नहीं ये दिन का ही वक्त है, लेकिन फिर इतना अंधेरा क्यों नहीं?, Well ऐसा ही कुछ आपके साथ होने वाला है अगर आप शुक्र की सतह पर खड़े होकर सूर्य उदय को देखने का प्रयास करें तो,
हा हां एक वक्त के लिए हम ये Assume कर लेते है की आपने जैसे तैसे शुक्र के 800 डिग्री के जलाकर राख कर देने वाले तापमान को सहन कर लिया और आप इसकी सतह तक भी आ पहुंचें, तो यकीन मानिए आपकी ये मेहनत बर्बाद ही जाएगी क्योंकी आप सूरज तो दूर बल्कि रोशनी की एक किरण को भी नहीं देख सकेंगे, और इसका सिंपल सा कारण है,
शुक्र का बेहद सघन वायुमंडल जो सूरज से निकल रहि रौशनी की एक किरण तक को पार नहिं जानें देता, यहां Sulphuric Acid के ये घनघोर बादल हमेशा सतह को अपने साए तलें छिपाएं रखते है, जिसका परिणाम ये निकलता है की कभी यहां जमीन तक रौशनी पहुंच ही नहिं पाती है, यहां अकसर अंधेरा ही रहता है, ज़रा सोचिए तो सही फौलाद तक को पिघला देने वाली गर्मी और उपर से घोर अंधेरा, वाकई अगर इस जहान में कहीं नर्क होगा तो वो हूबहू शुक्र के जैसा ही दीखता होगा!

Mars Planet
खैर शुक्र के बाद बारी है हमारी सपनों की मंजिल मंगल की, आज इंसान मंगल पर बसने के सपने देख रहा है और इन्हीं सपनों को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत में जुड़ा हुआ है, मंगल पर तमाम रोवर्स, लेंडर्स और हेलीकॉप्टर रोबोट्स भेजें गए है जो निरंतर ग्राउंड जिरों से हमें वहां के हाल बयान करते रहते है, इस कड़ी में हमने मंगल की सतह पर रहते हुए वहां के आकाश में सूरज की Presence को भी नोटिस किया है,

Luckily हम वहां होने वाले Sunset को भी देख पाएं है, & i am sure वो नजारा आपको आश्चर्यचकित करके रख देगा, जी हां मंगल की सतह से सूर्यास्त कुछ ऐसा दिखता है, नीलें आसमान सफेद रौशनी के साथ धुंधला सूरज धीरे धीरे अपनी आभा खोता है और जल्द ही क्षितिज पर अंधेरा घर लेता है, I mean After Sunset चंद मिनटों में Horizon तक सब अंधकार की जद में आ जाता है,
मंगल की सतह से देखने पर सूर्यास्त और सूर्योदय में कुछ खास फर्क दिखाईं नहीं पड़ता है, Obviously दोनों Events के होने की Direction बिल्कुल Opposite है, but इनकी Physical Appreance बिल्कुल Same लगती है, अब क्योंकी Mars पर बहुत सारी लाल धूल है इसलिए इसके आसमान में तो अधिकतर लाल रंग की नजर आता है, परंतु सूरज के उगने और डूबने से कुछ पहले और बाद में कुछ ऐसी नीली रौशनी भी दिखती है!

Saturn Moon Titan
तो जहां एक तरफ मंगल पर सूरज का यह दृश्य नीला है वहीं शनि के मशहूर चांद टाइटन से ये नज़ारा कुछ ऐसा दिखता है, चारों ओर से Hydrocarbons के घने बादलों में घिरा ये चांद अपने आप में एक बेहतरीन नमूना है एक Potential Life Hosting Planet का, हालांकि “यहां जिन्दगी है या नहिं?!” ये बाद की बात है मगर फिलहाल तो हमारा फोकस है
यहां होने वाले सूर्य अस्त और सूर्य उदय पर, जी हां ये है वो तवीरें जिन्हे Huygens Probe ने अपनी टाइटन यात्रा के दौरान लिया था, Titan चंद्रमा के बादलों के बिच होते हुए ये प्रोब सतह तक पंहुचा था, इस दौरान इसने बेहद बारिकी से इस ग्रह की वायुमंडलीय और भौगोलिक संरचनाओं का अध्ययन किया था, Horizon से नीचे की ओर सरकते हुए सूरज के साथ असमान भी रंग बदलता हुआ दिखता है, पहले पहले असमान गहरे पीले रंग का दिखाई पड़ता है मगर जैसे-जैसे सूरज अस्त होना शुरू होता है असमान रंग बदलकर नारंगी और फिर गहरे भूरे रंग का हो जाता है, वकाई यह कमाल का नजारा है!

Gas Gaints – Jupiter, Saturn, Uranus and Neptune
तो यह तो बात रही शुक्र मंगल और शनि के चांद टाइटन की मगर बाकी के ग्रहों जैसे – Jupiter, Saturn, Uranus और Neptune का क्या?, Well इन Gas giants पर वैसे तो आजतक कोई प्रोब नहीं उतरा है, in Fact उतरेगा भी कैसे?, यहां कोई ठोस सतह जो नहीं है, वास्तव में ये चारो Jovian Planets गैसों के संगठन से मिलकर बनी है इनकी कोई ठोस चट्टानी सताए नहीं है
“बल्की यह अपने आपमें गैसीय बादलों का एक ढेर है!” जो एक ग्रह की संचरना लिए हुए है, आजतक इन ग्रहों से सूरज के उदय या अस्त होने का कोई नजारा कैमरे में तो कैद नहीं हुआ़ but thanks to Geronimo Villanueva जो एक planetary scientist है NASA के Goddard Space Flight Center में, उन्होने हाल ही में एक शानदार Simulation तैयार किया है जिसकी मदद से हम अलग अलग ग्रहों पर होने वाले सूर्योदय और सूर्यास्त को देख सकते हैं, इस सिमुलेशन में तमाम वैज्ञानिक कारकों को मद्देनजर रखते हुए ये Visualizations तैयार किए गए है,

और इस पर नासा का यह दावा है की काफी हद तक ये बात मुमकिन है कि वाकई इन ग्रहों पर Sunsets कुछ ऐसे ही नजर आते हो, इस कड़ी में सौरमंडल के सबसे विशाल ग्रह बृहस्पति पर ये नजारा कुछ ऐसा दिखाई पड़ता है, तो वहीं इसके पड़ोसी शनि ग्रह पर यह मंजर कुछ ऐसा दिखता है, चारों ओर मैग्नीफिसेंट रिंग्स और उनके पीछे से उदय होता हुआ सूरज…. “वाकई यह नजारा देखते ही बनता है!”
इस दौड़ में अंतिम दो ग्रह अरुण और वरुण भी कुछ पीछे नहीं है, लिहाजा सूरज से बेहद दूर होने के चलते वहां रौशनी बेहद कम पहुंचती है, की वहां Day time में भी सूरज बेहद धुंधला और बुझा बुझा सा लगता है, -200 Degree Celcius के जमा देने वाले तापमान में रौशनी की ये किरणें क्या ही गर्मी का अहसास कराएंगी?, हालांकि इतना जरूर है की यह एक प्रतीक है यहां भी सूरज के influence और Light energy के Emission का!
Interstellar Space and Beyond
खैर, सूरज की पहुंच इससे भी बेहद दूर तक है, इतनी दूर जितना हम सोच भी नहीं सकते, मगर बेशक, सूरज की भी एक हद है! और उस हद के पार शुरूआत होती है Interstellar Space की, एक ऐसी जगह जहां सिवाए कड़ाके की सर्दी और खालीपन के कुछ भी नहिं है, मगर जब हम इन्हीं इलाकों से होते हुए अपने नजदीकी तारामंडलों तक पहुंचते हैं तो हमें कुछ ऐसा नजारा देखने को मिलता है,

Proxima Centauri System
जी हां ये है धरती से करीब साढ़े चार लाइट इयर्स की दुरी पर मौजूद Proxima Centauri Star system जिसके एक Planet Proxima B की सतह पर खडे होकर आसमान निहारने पर कुछ ऐसा नजारा सामने आता है, आसमान में एक नहीं बल्कि दो-दो सूरज दिखाई पड़ते हैं, एक बेहद बड़ा तो वही दूसरा थोड़ा छोटा, Well ऐसा इसलिए क्योंकी Proxima Centauri एक Binary Star Sytem है जो दो अलग अलग तारों – Proxima Centauri और Alpha Centauri Ab से मिलकर बना है,

इस ग्रह के बारे में एक मजेदार बात यह है की यहां मौजूद तापमान और वातावरण की अन्य स्थितियां जिन्दगी के फल्ली फूलने के लिए अनुकूल है साथ ही इस ग्रह का अपने दोनों ही सूर्यों के मध्य एक Goldilocks Zone में होना यहां पानी की तरल अवस्था में होने की संभावनाओं को भी और प्रबल करता है, पीछले कई सालों से वैज्ञानिक यहां Extraterretrial Life की तलाश में जुटे हुए है, मगर अब तक उनके हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगा है, खैर फिलहाल हमारे लिए यह जरूरी नहीं है की वहां जिन्दगी की तलाश कहां तक पहुंची?,

Trappist 1 System
बल्की अब आगे बढ़कर ये जानते है की एक और नजदीकी तारामंडल TRAPPIST-1 से सूर्यस्त कैसा दिखेगा, Well ये एक कमाल का तारामंडल है क्योंकि यहां मौजूद Parent Star Size में हमारे सूर्य का केवल 8% ही है, ये तारा सौरमंडल के सबसे विशाल ग्रह बृहस्पति से थोड़ा बड़ा है, हालांकि यह अपनी Red Giant Stage में पहूंच चूका है यानी इसमें मौजूद हाइड्रोजन खत्म होकर पूरी तरह हिलियम में बदल चुकी है
जिसके चलते इस से निकल रही रोशनी और Heat में बेहद बड़ी गिरावट आई हैं, हमारी जानकारी के मुताबिक इस तारे के गिर्द सात ग्रह चक्कर लगा रहें है जिनमें से शुरूआती दो गृहों पर जीवन होने की संभावनाएं भी जाहिर की गई है, बात करें अगर इन गृहों से सूर्य उदय के नजारे की, तो असमान का मंजर कुछ दिखाईं पड़ेगा, हालांकि हमें इन ग्रहों के वायुमंडल की फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है परंतु फिर भी हमारे अनुमान ये कहते है की यहां सूर्य अस्त या उदय का नजारा कुछ ऐसा ही दीखेगा!
इन ग्रहों की सतह से देखने पर पृथ्वी की तुलना में यहां सूर्य 4 गुना तक बढ़ा नजर आएगा, परंतु बेहद कम गर्म होने के चलते उससे निकल रही रोशनी बेहद धुंधली और फिंकी सी लगेगी, असमान का रंग सुर्ख लाल से लेकर गेहुआं तक हो सकता है कुछ विशेष परिस्थितियों में ये रंग भूरा और पिला भी दिख सकता हैं।

Well असमान के इन तमाम रंगों को देख क्या आपके जेहन में यह सवाल नहीं आता कि आखिर वह कौन से कारक है जो अलग अलग गृहों में सूर्य अस्त या सूर्य उदय के दौरान वहां के आसमान के रंग और उस आसमान में सूर्य की मौजूदगी के नजारे को प्रभावित करते हैं, बचपन के दिनों से ही हम इस बात को लेकर काफी आश्चर्यचकित रहते थे कि वास्तव में पृथ्वी का आसमान नीला ही क्यों दिखता है, क्या यह पृथ्वी पर मौजूद महासागरों की Reflection है या फिर वास्तव में यह बादलों के कारण नीला दिखता है?
इन तमाम क्यासों के बाद हमने विज्ञान की किताब में ये पढ़ा की पृथ्वी के आसमान का नीला दिखने का वास्तविक कारण, “Blue Light Scattering का Phenomenon हैं!”
सुबह के वक्त जब सूरज क्षितिज पर चढ़ता है तो आसमान का रंग लाल और नारंगी के बिच का होता है मगर जैसे जैसे दिन के वक्त सूरज ऊपर चढ़ता है तो असमान अपना रंग बदलकर कभी नीला तो कभी आसमानी सफेद हो जाता है और फिर जैसे ही वापस दिन ढलता है तो ये रंग फिर से संतरी और लाल हो जाता है, दरअसल रंगों की यह अदला-बदली
Light के Against हमारा ये असमान किसी Prism की तरह काम करता है और दिनभर में सूरज से अलग अलग Angel पर निकल रहि Rays को Scatter करके असमान का रंग बदलता रहता है।

सतरंगी स्पेक्ट्रम का ये खेल सौरमंडल के हर एक ग्रह पर अलग ढंग से होता है, इसे मुख्यत दो कारक प्रभावित करते है पहला उस गृह का वायुमंडल की संरचना और दूसरा उस गृह की उसके Parent Star से दुरी, हम सभी जानते हैं कि लाइट एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव है, जिसकी Speed और Angle of Displacement Medium to Medium Matter करता है, वायुमंडल यानी Atmosphere Usually Gaseous Consider किया जाता है
But इसमें भी मौजूद अलग अलग Gases की Densities और Overall Atmosphere में मौजूद Dust Particles Light के Behaviour को Control करते है, Example के लिए Earth जैसा एक प्लैनेट जिसके वायुमंडल की संरचना में मुख्य तौर पर ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसे शामिल है, यहां Light का Behaviour कुछ इस Pattern में दिखता है, Sun के Horizon के नजदीक होने पर Longest Wavelength वाली Red Light rays सबसे ज्यादा Scatter होती है
Otherwise Shortest Wavelengths वाली Blue और Voilet lights ही पूरे आसमान में छाई रहती है, हर एक प्लैनेट के Context में थोड़े बहुत Micro-Factors चेंज हो सकते हैं मगर ओवरऑल Light को Effect करने वाले ये Major Factors Universally ही Act करते है जिस कारण कारण Planet to Planet ये नज़ारा और असमान का रंग Variate करता है।




