
24 October 2014 , यह दिन न सिर्फ भारतीय space agency ISRO के लिए बल्कि पुरे भारत देश के लिए एक काफी महत्वपूर्ण दिन था क्यूंकि इसी दिन ISRO के सबसे महत्वाकांक्षी और अबतक के पहले Interplanetary Mission – Mangalyaan ने सफलतापूर्वक मंगल ग्रह के Orbit में दाखिल हुआ | पर अब इस बात को करीब 5 साल बीत चुके है और तब से यह मंगल ग्रह के Orbit में बना हुआ है और उसका लगातार अध्ययन कर रहा है | ऐसे में यहाँ एक सवाल है की आखिर इन पांच सालो में Mangalyaan Mission ने मंगल ग्रह पर क्या खोजा ,और इससे जुड़े हुए क्या खुलासे किये | और साथ ही आखिर इस Mission में कितना fuel बचा हुआ है जो और कितने समय तक काम करता रहेगा | तो दोस्तों इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े जहा आपको Mangalyaan Mission से जुड़े हुए सभी सवालो के जवाब मिल जाएंगे |

Mars Exploration की शुरुआत | Starting of Mars Exploration Missions
1960 के दशक से ही इंसानो ने मंगल ग्रह पर Space Missions भेजना शुरू कर दिया था | जिसका मुख्य मकसद था हमारे इस पडोसी ग्रह का करीबी से अध्ययन करना और इस ग्रह से जुडी हुई जानकारिया जुटाना | पर धीरे धीरे इन मिशनों द्वारा जुटाए गए आकड़ो से हमें पता चला की इस ग्रह में वह सब कुछ मौजूद है जो की भविष्य में इसे इंसानो का अगला बसेरा बना सकता है |

मंगल ग्रह पर भेजे गए मिशन | Mars Exploration Missions
965 में सफलतापूर्वक Flyby को अंजाम देने से लेकर अब तक केवल 4 ही देश ऐसे ही जो की अपने स्पेस मिशनों से इस ग्रह तक पहुंच पाए है , जिनमे हमारा भारत देश भी एक है | भारतीय space agency ISRO ने अपने पहले Interplanetary Mission की तैयारियां 2010 में ही शुरू कर दी थी | 2012 में इस मिशन को feasibility study और दूसरे अध्यनो के बाद भारत सरकार द्वारा Approve कर दिया गया ,जिसके बाद इस मिशन पर काम शुरू हुआ |
मंगलयान मिशन की शुरुआत | Starting of Mangalyaan Mission
ISRO के वैज्ञानिको ने Mangalyaan Mission को Record 15 महीनो में तैयार कर एक नया कीर्तिमान रच दिया | कुछ जरुरी Test करने के बाद 5 नवंबर 2013 को PSLV C25 Rocket के जरिये इसे shriharikota से लांच किया गया | जिसके बाद इसका बेहद ही लम्बा और थका देने वाला 10 महीनो का सफर शुरू हुआ | करीब 300 दिनों की लम्बी यात्रा करने के बाद 24 सितम्बर 2014 को यह मिशन सफलतापूर्वक मंगल ग्रह के orbit में दाखिल हुआ |

जिसके साथ ही भारत देश मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला केवल चौथा देश बन गया | इससे पहले केवल Americian space agency , European Space Agency और Russian Space Agency ने ही मंगल ग्रह पर सफल मिशन भेजे है | पर इन देशो को मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए कई प्रयास करने पड़े , वही इसके विपरीत भारत पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला पहला देश बन गया | साथ ही इस Mission का budget मात्र 73 Million Dollars यानि करीब 450 करोड़ है जो की Hollywood के कई science fiction movies जैसे की Martian और Gravity के 100 Million Dollars के budget से भी काफी कम है |

मंगलयान मिशन कब तक करता रहेगा काम | Mangalyaan Mission Life
शुरू में Mangalyaan Mission को केवल 6 महीनो तक चलने के लिए ही design किया गया था | यानी इसके spacecraft में मंगल ग्रह के orbit में scientific experiments करने के लिए केवल 6 महीने का ही Fuel मौजूद था | पर मंगल ग्रह तक पहुंचने के 10 महीनो के लम्बे सफर के दौरान ISRO के वैज्ञानिको ने काफी कुशलता से इसे Operate किया जिसकी वजह से इसका काफी Fuel बच गया |
और इसी वजह से आज करीब 5 साल बाद भी यह mission काफी अच्छे तरीके से क़ाम कर रहा है | और समय समय पर मंगल ग्रह से जुडी हुई कई महत्वपूर्ण जानकारिया और तस्वीरें ISRO तक भेजता रहता है | भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO के वैज्ञानिको के अनुसार इसमें अभी इतना fuel मौजूद है की यह आने वाले करीब 1 साल तक और क़ाम कर सकता है|जिसके बाद हमे इस मिशन को हमेशा के लिए अलविदा कहना होगा

मंगलयान मिशन ने मंगल ग्रह पर क्या खोजा | What Mangalyaan Mission Discovered on Mars
Mangalyaan Mission को इस तरह design किया गया है की यह कई दिनों तक बिना किसी Instruction और command के खुद ही अपना ध्यान रख सकता है और अपना क़ाम कर सकता है | Mangalyaan मिशन का Orbit – elliptical है जिसके कारण यह कभी कभी मंगल ग्रह के surface से काफी ज्यादा दूर चला जाता है जिसकी वजह से यह पहला मिशन बना जिसने इस ग्रह के पुरे Disk की तस्वीर एक साथ ली हो | साथ ही यह मिशन मंगल ग्रह के Moon – Deimos के far side का तस्वीर लेने वाला और उसका करीबी से अध्ययन करने वाला पहला मिशन बना |

यह मिशन अब तक मंगल ग्रह और उसके moons की करीब 1 हज़ार से ज्यादा तस्वीरें धरती तक भेज चूका है | जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिको को मंगल ग्रह के पुरे surface का map और atlas बनाने में काफी मदद की | साथ ही mangalyaan मिशन ने मंगल ग्रह पर आने वाले तूफानों का भी करीबी से अध्ययन किया और पहली बार वैज्ञानिको को बताया की मंगल ग्रह पर आने वाले तूफान इसके atmosphere में कई सैकड़ो kilometer तक ऊपर उठ सकते है |
इसके साथ ही इसने मंगल ग्रह के atmoshpere में मौजूद hydrogen isotope और Methane का काफी करीबी से अध्ययन किया और इसे लेकर भी कई महत्वपूर्ण खुलासे किये | पर यह मिशन अब अपने अंतिम दौर में है और वैज्ञानिको को उम्मीद है की यह बचे हुए करीब 1 सालो के दौरान मंगल ग्रह से जुड़े हुए कई और महत्वपूर्ण खोजे कर सकता है |

कैसा होगा मंगलयान 2 मिशन | ISRO Mangalyaan 2 Mission
भारतीय Space agency ISRO भविस्य में इस मिशन के successor यानी Mangalyaan 2 Mission पर विचार कर रहा है | काफी शंभावना है की Mangalyaan 2 Mission , Chandrayaan 2 की तरह एक orbiter , Lander mission को सकता है | अर्थात इस मिशन के साथ एक Orbiter , एक Lander और एक Orbiter Launch किया जा सकता है | जो की मंगल ग्रह पर Land कर इसके surface और atmosphere का और करीबी से अध्ययन कर सकता है | खैर अभी तक इस mission के बारे में कुछ भी final नहीं है और आने वाला भविस्य ही बताएगा की Mangalyaan 2 Mission कैसा होगा